Saturday, October 5, 2013
Monday, September 9, 2013
WRITTEN BY PSynth Mewara
मित्रो,
हर एक लडकी के लिए पढने जैसी कहानी..
लडके के लिए शिक्षा
मुझे तो लगता है,
कोई भी लडकी की सुदंरता उसके चेहरे से ज्यादा दिल की होती है।
अशोक भाई ने घर मेँ पैर रखा.... ‘सुनते हो ?'
आवाज सुनी अशोक भाई कि पत्नी हाथ मेँ पानी का ग्लाश लेकर बाहर आयी.
"अपनी सोनल का रिश्ता आया है,
अच्छा भला ईज्जतदार सुखी परिवार है,
लडके का नाम युवराज है.
बैँक मे काम करता है.
बस सोनल हा कह दे तो सगाई कर देते है."
सोनल उनकी एका एक लडकी थी..
घर मेँ हमेशा आनंद का वातावरण रहता था.
हा कभी अशोक भाई सिगरेट
पान मसाले के कारण
उनकी पत्नी और सोनल के साथ बोल चाल हो जाती लेकिन
अशोक भाई मजाक मेँ निकाल देते.
सोनल खुब समजदार और संस्कारी थी.
S.S.C पास करके टयुशन,सिलाई काम करके पापा की मदद करने की कोशिश करती,
अब तो सोनल ग्रज्येएट हो गई थी
और नोकरी भी करती थी
लेकिन अशोक भाई उसकी पगार मेँ से एक रुपिया भी नही लेते थे...
और रोज कहते ‘बेटा यह पगार तेरे पास रख तेरे भविष्य मेँ तेरे काम आयेगी.’
दोनो घरो की सहमति से सोनल और
युवराज की सगाई कर दी गई और शादी का मुर्हत भी निकलवा दिया.
अब शादी के 15 दिन और बाकी थे.
अशोक भाई ने सोनल को पास मेँ बिठाया और कहा
'बेटा तेरे ससुर से मेरी बात हुई...उन्होने कहा दहेज मेँ कुछ नही लेँगे, ना रुपये, ना गहने और ना ही कोई चीज.
तो बेटा तेरे शादी के लिए मेँने कुछ रुपये जमा किए..
यह दो लाख रुपये मैँ तुझे देता हु...तेरे भविष्य मेँ काम आयेगे, तु तेरे खाते मे जमा करवा देना.'
‘OK PAPA’ - सोनल ने छोटा सा जवाब देकर अपने रुम मेँ चली गई.
समय को जाते कहा देर लगती है ?
शुभ दिन बारात आगंन आयी,
पडित ने चवरी मेँ विवाह विधि शुरु की
फेरे फिरने का समय आया....
कोयल जैसे टुहुकी हो एसे सोनल दो शब्दो मेँ बोली
‘रुको पडिण्त जी
मुझे आप सब की मोजुदगी मेँ मेरे पापा के साथ बात करनी है,’
“पापा आप ने मुझे लाड प्यार से बडा किया,
पढाया,लिखाया खुब प्रेम दिया ईसका कर्ज तो चुका सकती नही...
लेकिन युवराज और मेरे ससुर जी की सहमति से आपने दिया दो लाख रुपये का चेक मैँ वापस देती हु...
इन रुपयो से मेरी शादी के लिए कीये हुए उधार वापस दे देना
और दुसरा चेक तीन लाख जो मेने अपनी पगार मेँ से बचत की है...
जब आप रिटायर होगेँ तब आपके काम आयेगेँ,
मैँ नही चाहती कि आप को बुढापे मेँ आपको किसी के आगे हाथ फैलाना पडे !
अगर मैँ आपका लडका होता तो इतना तो करता ना ? !!! "
वहा पर सभी की नजर सोनल पर थी...
“पापा अब मे आपसे मैँ जो दहेज मेँ मागु वो दोगे ?"
अशोक भाई भारी आवाज मेँ -"हा बेटा", इतना ही बोल सके.
"तो पापा मुझे वचन दो
आज के बाद सिगरेट के हाथ नही लगाओ गे....
तबांकु, पान-मसाले का व्यसन आज से छोड दोगे.
सब की मोजुदगी मेँ दहेज मेँ बस इतना ही मांगती हु."
लडकी का बाप मना कैसे करता ?
शादी मे लडकी की विदाई समय कन्या पक्ष को रोते देखा होगा लेकिन
आज तो बारातियो कि आँखो मेँ आँसुओ कि धारा निकल चुकी...
मैँ दुर से सोनल को लक्ष्मी रुप मे देख रहा था....
501 रुपये का कवर मेँ अपनी जेब से नही निकाल पा रहा था....
साक्षात लक्ष्मी को मे लक्ष्मी दु ??
लेकिन एक सवाल मेरे मन मेँ जरुर उठा,
===
शीख :
===
“भ्रुण हत्या करने वाले संसकारी लोगो को सोनल जैसी लक्ष्मी मिलेगी क्या ???
हर एक लडकी के लिए पढने जैसी कहानी..
लडके के लिए शिक्षा
मुझे तो लगता है,
कोई भी लडकी की सुदंरता उसके चेहरे से ज्यादा दिल की होती है।
अशोक भाई ने घर मेँ पैर रखा.... ‘सुनते हो ?'
आवाज सुनी अशोक भाई कि पत्नी हाथ मेँ पानी का ग्लाश लेकर बाहर आयी.
"अपनी सोनल का रिश्ता आया है,
अच्छा भला ईज्जतदार सुखी परिवार है,
लडके का नाम युवराज है.
बैँक मे काम करता है.
बस सोनल हा कह दे तो सगाई कर देते है."
सोनल उनकी एका एक लडकी थी..
घर मेँ हमेशा आनंद का वातावरण रहता था.
हा कभी अशोक भाई सिगरेट
पान मसाले के कारण
उनकी पत्नी और सोनल के साथ बोल चाल हो जाती लेकिन
अशोक भाई मजाक मेँ निकाल देते.
सोनल खुब समजदार और संस्कारी थी.
S.S.C पास करके टयुशन,सिलाई काम करके पापा की मदद करने की कोशिश करती,
अब तो सोनल ग्रज्येएट हो गई थी
और नोकरी भी करती थी
लेकिन अशोक भाई उसकी पगार मेँ से एक रुपिया भी नही लेते थे...
और रोज कहते ‘बेटा यह पगार तेरे पास रख तेरे भविष्य मेँ तेरे काम आयेगी.’
दोनो घरो की सहमति से सोनल और
युवराज की सगाई कर दी गई और शादी का मुर्हत भी निकलवा दिया.
अब शादी के 15 दिन और बाकी थे.
अशोक भाई ने सोनल को पास मेँ बिठाया और कहा
'बेटा तेरे ससुर से मेरी बात हुई...उन्होने कहा दहेज मेँ कुछ नही लेँगे, ना रुपये, ना गहने और ना ही कोई चीज.
तो बेटा तेरे शादी के लिए मेँने कुछ रुपये जमा किए..
यह दो लाख रुपये मैँ तुझे देता हु...तेरे भविष्य मेँ काम आयेगे, तु तेरे खाते मे जमा करवा देना.'
‘OK PAPA’ - सोनल ने छोटा सा जवाब देकर अपने रुम मेँ चली गई.
समय को जाते कहा देर लगती है ?
शुभ दिन बारात आगंन आयी,
पडित ने चवरी मेँ विवाह विधि शुरु की
फेरे फिरने का समय आया....
कोयल जैसे टुहुकी हो एसे सोनल दो शब्दो मेँ बोली
‘रुको पडिण्त जी
मुझे आप सब की मोजुदगी मेँ मेरे पापा के साथ बात करनी है,’
“पापा आप ने मुझे लाड प्यार से बडा किया,
पढाया,लिखाया खुब प्रेम दिया ईसका कर्ज तो चुका सकती नही...
लेकिन युवराज और मेरे ससुर जी की सहमति से आपने दिया दो लाख रुपये का चेक मैँ वापस देती हु...
इन रुपयो से मेरी शादी के लिए कीये हुए उधार वापस दे देना
और दुसरा चेक तीन लाख जो मेने अपनी पगार मेँ से बचत की है...
जब आप रिटायर होगेँ तब आपके काम आयेगेँ,
मैँ नही चाहती कि आप को बुढापे मेँ आपको किसी के आगे हाथ फैलाना पडे !
अगर मैँ आपका लडका होता तो इतना तो करता ना ? !!! "
वहा पर सभी की नजर सोनल पर थी...
“पापा अब मे आपसे मैँ जो दहेज मेँ मागु वो दोगे ?"
अशोक भाई भारी आवाज मेँ -"हा बेटा", इतना ही बोल सके.
"तो पापा मुझे वचन दो
आज के बाद सिगरेट के हाथ नही लगाओ गे....
तबांकु, पान-मसाले का व्यसन आज से छोड दोगे.
सब की मोजुदगी मेँ दहेज मेँ बस इतना ही मांगती हु."
लडकी का बाप मना कैसे करता ?
शादी मे लडकी की विदाई समय कन्या पक्ष को रोते देखा होगा लेकिन
आज तो बारातियो कि आँखो मेँ आँसुओ कि धारा निकल चुकी...
मैँ दुर से सोनल को लक्ष्मी रुप मे देख रहा था....
501 रुपये का कवर मेँ अपनी जेब से नही निकाल पा रहा था....
साक्षात लक्ष्मी को मे लक्ष्मी दु ??
लेकिन एक सवाल मेरे मन मेँ जरुर उठा,
===
शीख :
===
“भ्रुण हत्या करने वाले संसकारी लोगो को सोनल जैसी लक्ष्मी मिलेगी क्या ???
Thursday, August 29, 2013
Ashish Aku
बन्नो तेरी अंखियाँ सूरमेदानी///बन्नो तेरा मुखड़ा लाख का रे/// बन्नो तेरा कंगन है हजारी/// बन्नो तेरा झुमका लाख का रे/// बन्नो तेरी झांझर है हजारी/// बन्नो तेरी मुँदरी लाख की रे/// बन्नो तेरी नथनी है हजारी/// बन्नो तेरा जोड़ा लाख का रे/// बन्नो तेरा टीका है हजारी/// बन्नो तेरा बन्ना लाख का रे///बन्नो तेरी जोड़ी है हजारी/// बन्नो तेरी अंखियाँ सूरमेदानी
Ashish Aku
बन्नो तेरी अंखियाँ सूरमेदानीबन्नो तेरा मुखड़ा लाख का रे
बन्नो तेरा कंगन है हजारी
बन्नो तेरा झुमका लाख का रे
बन्नो तेरी झांझर है हजारी
बन्नो तेरी मुँदरी लाख की रे
बन्नो तेरी नथनी है हजारी
बन्नो तेरा जोड़ा लाख का रे
बन्नो तेरा टीका है हजारी
बन्नो तेरा बन्ना लाख का रे
बन्नो तेरी जोड़ी है हजारी
बन्नो तेरी अंखियाँ सूरमेदानी
Sunday, August 18, 2013
ठाकुर जी मुलायम सिंह यादव, ठाकुर जी अखिलेश यादव, ठाकुर जी रामगोपाल यादव ने कहा है कि दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन को वापस करने को यदि केंद्र कहता है तो हम प्रदेश के सारे आई ऐ एस केंद्र को लौटा देंगे. हमें आई ए एस की ज़रुरत नहीं है.
भई वाह. इस पर शोभा डे ने ट्वीट करके बेहद सटीक आकलन किया है ---
" मैं अखिलेश, उसके बाप मुलायम से सहमत हूँ की उत्तरप्रदेश में किसी आई ए एस की ज़रुरत नहीं है. क्योंकि उत्तरप्रदेश में गुंडे, बदमाश, माफिया राज्य चला रहे हैं बिना आई ऐ एस के भी वे राज्य को बखूबी चला लेंगे "
मज़ा आया उत्तरप्रदेश के वोटरों !!!! और बुलाओ माफिया कुनबा और उसके ' भाई लोगों ' को वोट दे कर ! अब भुगतो पूरे पांच वर्ष. या हल यह है की केंद्र पर, राष्ट्रपति पर उत्तरप्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की गुहार करो. जेलें भरो अपनी इस मांग को ले कर. इतना कि माफिया कुनबा और उसके ' भाई लोग ' पूंछ दबा कर बिलों में घुसने पर मजबूर हो जाएँ और बिलों में ही बने रहें पहले के सामान
बहुत बढ़िया लिखा भाई साहेब
भई वाह. इस पर शोभा डे ने ट्वीट करके बेहद सटीक आकलन किया है ---
" मैं अखिलेश, उसके बाप मुलायम से सहमत हूँ की उत्तरप्रदेश में किसी आई ए एस की ज़रुरत नहीं है. क्योंकि उत्तरप्रदेश में गुंडे, बदमाश, माफिया राज्य चला रहे हैं बिना आई ऐ एस के भी वे राज्य को बखूबी चला लेंगे "
मज़ा आया उत्तरप्रदेश के वोटरों !!!! और बुलाओ माफिया कुनबा और उसके ' भाई लोगों ' को वोट दे कर ! अब भुगतो पूरे पांच वर्ष. या हल यह है की केंद्र पर, राष्ट्रपति पर उत्तरप्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की गुहार करो. जेलें भरो अपनी इस मांग को ले कर. इतना कि माफिया कुनबा और उसके ' भाई लोग ' पूंछ दबा कर बिलों में घुसने पर मजबूर हो जाएँ और बिलों में ही बने रहें पहले के सामान
बहुत बढ़िया लिखा भाई साहेब
Tuesday, July 2, 2013
http://www.topix.com/forum/religion/sikh/TEFGTVCVLPFC5ABCR/p11
COPY & PASTE TO READ BABA DEEP SINGH
http://www.topix.com/forum/religion/sikh/TEFGTVCVLPFC5ABCR/p11
http://www.topix.com/forum/religion/sikh/TEFGTVCVLPFC5ABCR/p11
प्रचंड नाग सन 1933 में हरिजन जगजीवन राम ने गांधीजी की प्रेरणा से "दलित संघ" नामक संगठन बनाया था । डॉ आंबेडकर को यह शब्द पता होने के बावजूद उन्होने इसका इस्तेमाल कभी नहीं किया । "दलित पेन्थर्स" ब्राह्मणों के इशारों पर आंदोलन की दिशा को मोड़ने के लिए चलाया गया आंदोलन था । पेंथर कभी दलित नहीं होता और पेंथर अगर दलित हुआ तो शिकार नहीं कर सकता । दलित पेन्थर्स को शुरू करने वाले सभी दलित -दलिद्दर आज ब्राह्मणों के घर पानी भर रहे हैं तथा वहीं से पुनः निर्देश पा रहे हैं । डॉ आंबेडकर हमें बुद्धिज़्म की ओर ले गए आप हमें दलिद्दर क्यों बनाना चाहते हैं !
प्रचंड नाग
सन
1933 में हरिजन जगजीवन राम ने गांधीजी की प्रेरणा से "दलित संघ" नामक
संगठन बनाया था । डॉ आंबेडकर को यह शब्द पता होने के बावजूद उन्होने इसका
इस्तेमाल कभी नहीं किया । "दलित पेन्थर्स" ब्राह्मणों के इशारों पर आंदोलन
की दिशा को मोड़ने के लिए चलाया गया आंदोलन था । पेंथर कभी दलित नहीं होता
और पेंथर अगर दलित हुआ तो शिकार नहीं कर सकता । दलित पेन्थर्स को शुरू करने
वाले सभी दलित -दलिद्दर आज ब्राह्मणों के घर पानी भर रहे हैं तथा वहीं से
पुनः निर्देश पा रहे हैं । डॉ आंबेडकर हमें बुद्धिज़्म की ओर ले गए आप हमें
दलिद्दर क्यों बनाना चाहते हैं !
who told u that mazhabi sikhs doesnt has history in sikhism???????? u should search mazhabi sikh on google then u may know about real sikhs..dhan dhan baba deep singh ji, baba jiwan singh ji, akali phula singh,bhai mani singh,dhir singh,bir singh,dyala singh and many more all r mazhabi sikhs the history makers...only maharaja ranjit singh n mai bhago belongs to jatt..all of our guru,s are khatris
who told u that mazhabi sikhs doesnt has history in sikhism???????? u
should search mazhabi sikh on google then u may know about real
sikhs..dhan dhan baba deep singh ji, baba jiwan singh ji, akali phula
singh,bhai mani singh,dhir singh,bir singh,dyala singh and many more all
r mazhabi sikhs the history makers...only maharaja ranjit singh n mai
bhago belongs to jatt..all of our guru,s are khatris
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